महादेव्याः आविर्भाव-रूपान्तर-विहारवर्णनम्
Manifestation, Forms, and Divine Play of the Mahādevī
आपत्सु ब्राह्मणो मांसं मेध्यमश्नन्न दोषभाक् / विहितानि तु कार्याणि प्रतिषिद्धानि वर्जयेत्
āpatsu brāhmaṇo māṃsaṃ medhyamaśnanna doṣabhāk / vihitāni tu kāryāṇi pratiṣiddhāni varjayet
आपत्ति के समय ब्राह्मण यदि शुद्ध (मेध्य) मांस खाए तो वह दोष का भागी नहीं होता। पर जो कर्म विधि से कहे गए हैं उन्हें करे और जो निषिद्ध हैं उन्हें त्याग दे।