महादेव्याः आविर्भाव-रूपान्तर-विहारवर्णनम्
Manifestation, Forms, and Divine Play of the Mahādevī
इति शप्त्वा विनीतेन तेन संपूजितो ऽपि सः / तूष्णीमेव ययौ ब्रह्मन्भाविकार्यमनुस्मरन्
iti śaptvā vinītena tena saṃpūjito 'pi saḥ / tūṣṇīmeva yayau brahmanbhāvikāryamanusmaran
इस प्रकार शाप देकर, उस विनीत द्वारा पूजित होने पर भी वह (ऋषि) हे ब्रह्मन्, होने वाले कार्य को स्मरण करता हुआ मौन ही चला गया।