Pratisarga-pravartana (How Re-Creation Proceeds) / पुनःसर्ग-प्रवर्तन
वाचो वेदा अन्तरिक्षं शरीरं क्षितिः पादास्तारका रोमकूपाः / सर्वाणि द्यौर्मस्तकानि त्वथो वै विद्याश्चैवोपनिषद्यस्य पुच्छम्
vāco vedā antarikṣaṃ śarīraṃ kṣitiḥ pādāstārakā romakūpāḥ / sarvāṇi dyaurmastakāni tvatho vai vidyāścaivopaniṣadyasya puccham
वेद उसकी वाणी हैं, अन्तरिक्ष उसका शरीर है, पृथ्वी उसके पाँव हैं, तारे उसके रोमकूप हैं; समस्त द्युलोक उसके मस्तक हैं, और विद्याएँ तथा उपनिषदें उसका पुच्छ हैं।