Pratisarga-pravartana (How Re-Creation Proceeds) / पुनःसर्ग-प्रवर्तन
स सर्वैर्मुच्यते पापैः पुण्यं च महदाप्नुयात् / यश्चेदं श्रावयेद्विद्वान्सदा पर्वणि पर्वणि
sa sarvairmucyate pāpaiḥ puṇyaṃ ca mahadāpnuyāt / yaścedaṃ śrāvayedvidvānsadā parvaṇi parvaṇi
वह समस्त पापों से मुक्त हो जाता है और महान् पुण्य प्राप्त करता है; और जो विद्वान् इसे सदा पर्व-पर्व पर सुनाए,