Pratisarga-pravartana (How Re-Creation Proceeds) / पुनःसर्ग-प्रवर्तन
तेषां कीर्तिमतां कीर्तिं प्रजेशानां महात्मनाम् / प्रथयन्पृथिवीशानां ब्रह्मभूयाय गच्छति
teṣāṃ kīrtimatāṃ kīrtiṃ prajeśānāṃ mahātmanām / prathayanpṛthivīśānāṃ brahmabhūyāya gacchati
उन कीर्तिमान, महात्मा प्रजापतियों और पृथ्वीशों की कीर्ति का विस्तार करते हुए वह ब्रह्मत्व (ब्रह्मभूय) को प्राप्त होता है।