Pratisarga-pravartana (How Re-Creation Proceeds) / पुनःसर्ग-प्रवर्तन
अव्यक्तात्कारणात्तस्मान्नित्यात्सदसदात्मकात् / प्रधानपुरुषाभ्यां तु जायते च महेश्वरः
avyaktātkāraṇāttasmānnityātsadasadātmakāt / pradhānapuruṣābhyāṃ tu jāyate ca maheśvaraḥ
उस नित्य, सत्-असत्-स्वरूप अव्यक्त कारण से, प्रधान और पुरुष के संयोग से महेश्वर प्रकट होते हैं।