Pratisarga-pravartana (How Re-Creation Proceeds) / पुनःसर्ग-प्रवर्तन
यस्माद्वाचो निवर्त्तन्ते त्वप्राप्य मनसा सह / अव्यक्त वत्परोक्षत्वाद्गहनं तद्दुरासदम्
yasmādvāco nivarttante tvaprāpya manasā saha / avyakta vatparokṣatvādgahanaṃ taddurāsadam
जिस तक मन सहित वाणी पहुँच नहीं पाती, वहाँ से वे लौट आती हैं। अव्यक्त के समान परोक्ष होने से वह गहन और दुर्गम है।