भण्डासुरवधोत्तरकृत्य-देवस्तुति
Aftermath of Bhaṇḍāsura’s Slaying and the Gods’ Hymn to Lalitā
अप्रतीकारपुरुषं विरहं तुहितुः शिवे / अवलोक्य स शैलेन्द्रो महादुःखमवाप्तवान्
apratīkārapuruṣaṃ virahaṃ tuhituḥ śive / avalokya sa śailendro mahāduḥkhamavāptavān
हे शिवे! पुत्री के उस निरुपाय विरह को देखकर शैलेंद्र (हिमवान) को महान दुःख प्राप्त हुआ।