भण्डासुरवधोत्तरकृत्य-देवस्तुति
Aftermath of Bhaṇḍāsura’s Slaying and the Gods’ Hymn to Lalitā
प्रभूतविरहज्वालामलिनैः श्वसितानलैः / शुष्यमाणाधरदलो भृशं पाण्डुकपोलभूः
prabhūtavirahajvālāmalinaiḥ śvasitānalaiḥ / śuṣyamāṇādharadalo bhṛśaṃ pāṇḍukapolabhūḥ
विरह की प्रचण्ड ज्वाला से मलिन हुई उसकी साँसें मानो अग्नि बन गईं; उसके होंठों की पंखुड़ियाँ सूखने लगीं और गाल अत्यन्त पीले पड़ गए।