भण्डासुरवधोत्तरकृत्य-देवस्तुति
Aftermath of Bhaṇḍāsura’s Slaying and the Gods’ Hymn to Lalitā
तामेव सर्वतः पश्यंस्तस्यामेव मनो दिशन् / तथैव संल्लपन्सार्धमुन्मादेनोपपन्नया
tāmeva sarvataḥ paśyaṃstasyāmeva mano diśan / tathaiva saṃllapansārdhamunmādenopapannayā
वह चारों ओर उसी को देखता, मन उसी में लगाता और उन्माद-सी अवस्था में पड़ी हुई उसके साथ वैसे ही प्रेमपूर्वक बातें करता रहा।