भण्डासुरवधोत्तरकृत्य-देवस्तुति
Aftermath of Bhaṇḍāsura’s Slaying and the Gods’ Hymn to Lalitā
यो भण्डदैत्यस्य दुराशयस्य मित्रं स लोकत्रयधूमकेतुः / श्रीकण्ठपुत्रैण रणे हतश्चेत्प्राणप्रतिष्ठैव तदा भवेन्नः
yo bhaṇḍadaityasya durāśayasya mitraṃ sa lokatrayadhūmaketuḥ / śrīkaṇṭhaputraiṇa raṇe hataścetprāṇapratiṣṭhaiva tadā bhavennaḥ
जो दुराशयी भण्ड दैत्य का मित्र है, वही तीनों लोकों का धूमकेतु-सा उपद्रवकारी है। यदि वह श्रीकण्ठ-पुत्र द्वारा रण में मारा जाए, तो हमारे लिए वही प्राण-प्रतिष्ठा के समान होगा।