प्रत्याहारवर्णनम्
Pratyāhāra—Cosmic Withdrawal / Dissolution Sequence
न क्षीयते न क्षरति विकारप्रसृतं तु तत् / अक्षरं तेन वाप्युक्तम क्षीणत्वात्तथैव च
na kṣīyate na kṣarati vikāraprasṛtaṃ tu tat / akṣaraṃ tena vāpyuktama kṣīṇatvāttathaiva ca
वह न क्षीण होता है, न बहता/क्षरित होता है; यद्यपि विकारों में प्रसृत प्रतीत होता है। इसलिए उसे ‘अक्षर’ कहा गया है, क्योंकि वह अक्षीण रहता है।