प्रत्याहारवर्णनम्
Pratyāhāra—Cosmic Withdrawal / Dissolution Sequence
अप्रद्वेषो ऽनभिष्वङ्गः प्रीतितापविवर्जनम् / वैराग्यकारणं ह्येते प्रकृतीनां लयस्य च
apradveṣo 'nabhiṣvaṅgaḥ prītitāpavivarjanam / vairāgyakāraṇaṃ hyete prakṛtīnāṃ layasya ca
द्वेष का अभाव, आसक्ति का न होना, और प्रियता तथा ताप से रहित होना—ये वैराग्य के कारण हैं और प्रकृतियों के लय के भी।