प्रत्याहारवर्णनम्
Pratyāhāra—Cosmic Withdrawal / Dissolution Sequence
अनित्यमशिवं दुःखमिति वुद्ध्यानुचिन्त्य च / विशुद्धं कार्यकरणं सत्त्वस्यातिनिषैवया
anityamaśivaṃ duḥkhamiti vuddhyānucintya ca / viśuddhaṃ kāryakaraṇaṃ sattvasyātiniṣaivayā
इसे ‘अनित्य, अशिव और दुःखरूप’ जानकर बुद्धि से निरन्तर चिन्तन करने पर, अत्यन्त साधना से सत्त्व का कार्य-करण शुद्ध हो जाता है।