प्रत्याहारवर्णनम्
Pratyāhāra—Cosmic Withdrawal / Dissolution Sequence
निरञ्जनत्वाच्छुद्धस्तु नितान्यो नैव विद्यते / अत ऊर्द्ध्वं प्रवक्ष्यामि वैराग्यं दोषदर्शनात्
nirañjanatvācchuddhastu nitānyo naiva vidyate / ata ūrddhvaṃ pravakṣyāmi vairāgyaṃ doṣadarśanāt
निरञ्जन होने से वह शुद्ध है; उसके समान कोई अन्य नित्य नहीं है। अब आगे मैं दोष-दर्शन से उत्पन्न वैराग्य का वर्णन करूँगा।