वर्णाश्रमविरुद्धो यः शिष्टशास्त्रविरोधकः / एष मार्गो हि निरये तिर्य्यग्योनौ च कारणम्
varṇāśramaviruddho yaḥ śiṣṭaśāstravirodhakaḥ / eṣa mārgo hi niraye tiryyagyonau ca kāraṇam
जो वर्णाश्रम के विरुद्ध और शिष्ट-शास्त्र के विरोध में चलता है—वही मार्ग नरक और तिर्यक्-योनि का कारण बनता है।