प्रत्याहारवर्णनम्
Pratyāhāra—Cosmic Withdrawal / Dissolution Sequence
श्रोत्रजा नेत्रजा चैव त्वग्जिह्वाघ्राणजा तथा / पुनर्भवकरी दुःखात्कर्मणा जायते तृषा
śrotrajā netrajā caiva tvagjihvāghrāṇajā tathā / punarbhavakarī duḥkhātkarmaṇā jāyate tṛṣā
श्रवण, नेत्र, त्वचा, जिह्वा और घ्राण से उत्पन्न विषय-तृष्णा—कर्म के कारण दुःख से जन्म लेती है और पुनर्भव कराने वाली होती है।