प्रत्याहारवर्णनम्
Pratyāhāra—Cosmic Withdrawal / Dissolution Sequence
दक्षिणाभिस्ततीयेन बद्धो ऽत्यन्तं विवर्त्तते / इत्येते वै त्रयः प्रोक्ता बन्धा ह्यज्ञानहेतुकाः
dakṣiṇābhistatīyena baddho 'tyantaṃ vivarttate / ityete vai trayaḥ proktā bandhā hyajñānahetukāḥ
दक्षिणा-आसक्ति के तीसरे बंधन से बँधा हुआ जीव अत्यन्त भटकता है। ये तीनों बंधन कहे गए हैं, जिनका कारण अज्ञान ही है।