प्रत्याहारवर्णनम्
Pratyāhāra—Cosmic Withdrawal / Dissolution Sequence
सचेतनाः प्रलीयन्ते क्षेत्रज्ञाधिष्ठिता गुणाः / सर्गे च प्रतिसर्गे च संसारे चैव जन्तवः
sacetanāḥ pralīyante kṣetrajñādhiṣṭhitā guṇāḥ / sarge ca pratisarge ca saṃsāre caiva jantavaḥ
क्षेत्रज्ञ के अधिष्ठान में स्थित चेतनायुक्त गुण प्रलय में लीन हो जाते हैं; और सृष्टि‑प्रतिसृष्टि तथा संसार में जीव निरन्तर प्रवर्तित रहते हैं।