प्रत्याहारवर्णनम्
Pratyāhāra—Cosmic Withdrawal / Dissolution Sequence
ग्रस्ते च सलिले तेजः सर्वतोमुखमीक्षते / अथाग्निः सर्वतो व्याप्त आदत्ते तज्जलं तदा
graste ca salile tejaḥ sarvatomukhamīkṣate / athāgniḥ sarvato vyāpta ādatte tajjalaṃ tadā
जब जल ग्रस लिया जाता है, तब तेज सर्वतोमुख होकर देखता है। फिर सर्वत्र व्याप्त अग्नि उस जल को तब ग्रहण कर लेती है।