Viśukra–Viṣaṅga-vadha (The Slaying of Viśukra and Viṣaṅga) — Lalitopākhyāna
ललितां शरणं प्राप्ताः पाहि पाहीति सत्वरम् / अथ देवी भृशं क्रुद्धा रुषाट्टहासमातनोत्
lalitāṃ śaraṇaṃ prāptāḥ pāhi pāhīti satvaram / atha devī bhṛśaṃ kruddhā ruṣāṭṭahāsamātanot
वे ललिता की शरण में आकर शीघ्र ही “पाहि, पाहि” कहकर रक्षा की याचना करने लगे। तब देवी अत्यन्त क्रुद्ध होकर रोष से अट्टहास करने लगीं।