Viśukra–Viṣaṅga-vadha (The Slaying of Viśukra and Viṣaṅga) — Lalitopākhyāna
तस्याः स्त्रियाः प्रमत्तायाः कण्ठोत्थैः शोणितद्रवैः / भ्रातृपुत्रमहाशोकवह्निं निर्वापयाम्यहम्
tasyāḥ striyāḥ pramattāyāḥ kaṇṭhotthaiḥ śoṇitadravaiḥ / bhrātṛputramahāśokavahniṃ nirvāpayāmyaham
उस उन्मत्त स्त्री के कंठ से निकले हुए रक्त प्रवाह से मैं अपने भाइयों और पुत्रों के वियोग की महाशोक रूपी अग्नि को शांत करूँगा।