त्वं हि दुर्जननेत्राणां तिरस्कारमहौषधी / त्वया बद्धदृशानेन दैत्यचक्रेण भूयते
tvaṃ hi durjananetrāṇāṃ tiraskāramahauṣadhī / tvayā baddhadṛśānena daityacakreṇa bhūyate
तू ही दुर्जनों की आँखों के लिए तिरस्कार-रूपी महौषधि है; तेरे द्वारा दृष्टि बाँध दिए जाने से दैत्य-चक्र और भी क्षीण हो जाता है।