बलाहकादिसप्तसेनानायकप्रेषणम् (Dispatch of the Seven Commanders beginning with Balāhaka) / Lalitopākhyāna War Continuation
आरुह्य विविधंयुद्धं कृतवान्युद्धदुर्मदः / पक्षौ वितत्य क्रोशार्धं स स्थितो भीमनिःस्वनैः / अङ्गारकुण्डवच्चञ्चुं विदार्याभक्षयच्चमूम्
āruhya vividhaṃyuddhaṃ kṛtavānyuddhadurmadaḥ / pakṣau vitatya krośārdhaṃ sa sthito bhīmaniḥsvanaiḥ / aṅgārakuṇḍavaccañcuṃ vidāryābhakṣayaccamūm
वह युद्ध के उन्माद से भरकर विविध युद्ध में चढ़ आया। उसने कोस-भर के आधे तक पंख फैलाए और भयानक गर्जना करता हुआ खड़ा रहा। अंगार-कुंड के समान चोंच से विदीर्ण कर उसने सेना को निगल लिया।