एकैव सा तार्क्ष्यरथा पञ्चभिः पृतनेश्वरी / लघुहस्ततया युद्धे चक्रे वै शस्त्रवर्षिणी
ekaiva sā tārkṣyarathā pañcabhiḥ pṛtaneśvarī / laghuhastatayā yuddhe cakre vai śastravarṣiṇī
वह अकेली ही गरुड़-रथ पर आरूढ़ होकर पाँचों सेनापतियों के सामने युद्ध में अपनी तीव्र हस्तकौशल से शस्त्रों की वर्षा करने लगी।