दुर्मद-कुरण्ड-वधः (The Slaying of Durmada and Kuraṇḍa) — Lalitopākhyāna Battle Continuation
ते स्वामिनं नमस्कृत्य कुटिलाक्षेण देशिताः / अग्नौ प्रविष्णव इव क्रोधान्धा निर्ययुः पुरात्
te svāminaṃ namaskṛtya kuṭilākṣeṇa deśitāḥ / agnau praviṣṇava iva krodhāndhā niryayuḥ purāt
वे अपने स्वामी को प्रणाम कर, कुटिलाक्ष के आदेश से, क्रोध से अन्धे होकर, मानो अग्नि में प्रविष्ट होने वाले की भाँति, नगर से बाहर निकल पड़े।