Ābhūta-saṃplava & Loka-vibhāga
Dissolution Threshold and the Fourteen Abodes
सद्यश्चोत्पद्यते तेषां मनसा सर्वमीप्सितम् / एते देवा यजन्ते वै यज्ञैः सर्वैः परस्परम्
sadyaścotpadyate teṣāṃ manasā sarvamīpsitam / ete devā yajante vai yajñaiḥ sarvaiḥ parasparam
उनके लिए मन से ही समस्त इच्छित वस्तु तत्काल उत्पन्न हो जाती है। वे देव परस्पर एक-दूसरे को सभी प्रकार के यज्ञों द्वारा पूजते हैं।