Ābhūta-saṃplava & Loka-vibhāga
Dissolution Threshold and the Fourteen Abodes
ब्रह्महत्या च यः कुर्याद्यश्च स्याद्गुरुतल्पगः / सप्तकुम्भेष्वसौ गामी तथा राजभटश्च यः
brahmahatyā ca yaḥ kuryādyaśca syādgurutalpagaḥ / saptakumbheṣvasau gāmī tathā rājabhaṭaśca yaḥ
जो ब्रह्महत्या करता है और जो गुरु-पत्नी के शय्या का अपराधी होता है—वह सप्तकुम्भ नामक नरक में जाता है; और जो राजभट (राजसेवक) होकर अधर्म करता है, वह भी।