ललिताप्रादुर्भाव-स्तुति
Lalita’s Cosmic Praise and Body–Cosmos Correspondences
पुत्रमित्रकल त्राढ्या भवन्तु मदनुग्रहात् / इति लब्धवरा देवा देवेन्द्रो ऽपि महाबलः
putramitrakala trāḍhyā bhavantu madanugrahāt / iti labdhavarā devā devendro 'pi mahābalaḥ
मेरे अनुग्रह से तुम पुत्र, मित्र और कलत्र सहित समृद्ध होओ—ऐसा वर पाकर देवगण, महाबली देवेन्द्र भी, प्रसन्न हुए।