ललिताप्रादुर्भाव-स्तुति
Lalita’s Cosmic Praise and Body–Cosmos Correspondences
नामरूपविभागं च या करोति स्वलीलया / तान्यधिष्ठाय तिष्ठन्ती तेष्वसक्तार्थकामदा / नमस्तस्यै महादेव्यै सर्वशक्त्यै नमोनमः
nāmarūpavibhāgaṃ ca yā karoti svalīlayā / tānyadhiṣṭhāya tiṣṭhantī teṣvasaktārthakāmadā / namastasyai mahādevyai sarvaśaktyai namonamaḥ
जो अपनी लीला से नाम और रूप का विभाग करती है, और उन्हीं को अधिष्ठान बनाकर स्थित रहती है, फिर भी उनमें आसक्त नहीं होती—वही अर्थ और कामना देने वाली है। उस महादेवी, सर्वशक्ति को बार-बार नमस्कार।