ललिताप्रादुर्भाव-स्तुति
Lalita’s Cosmic Praise and Body–Cosmos Correspondences
इति श्रीब्रह्माण्डमहापुराणे उत्तरभागे हयग्रीवागस्त्यसंवादे ललितोपाख्याने ललिताप्रादुर्भावो नाम द्वादशो ऽध्यायः देवा ऊचुः जय देवि जगन्मातर्जय देवि परात्परे / जय कल्याणनिलये जय कामकलात्मिके
iti śrībrahmāṇḍamahāpurāṇe uttarabhāge hayagrīvāgastyasaṃvāde lalitopākhyāne lalitāprādurbhāvo nāma dvādaśo 'dhyāyaḥ devā ūcuḥ jaya devi jaganmātarjaya devi parātpare / jaya kalyāṇanilaye jaya kāmakalātmike
इस प्रकार श्रीब्रह्माण्डमहापुराण के उत्तरभाग में हयग्रीव–अगस्त्य संवाद के ललितोपाख्यान में ‘ललिता-प्रादुर्भाव’ नामक बारहवाँ अध्याय। देव बोले— जय हो देवी जगन्माता, जय हो परम परा देवी। जय हो कल्याण-धाम, जय हो कामकला-स्वरूपिणी।