Vaṃśānuvārṇana and the Transition to the Fourth (Upasaṃhāra) Pada
वैवस्वत निसर्गेण तेषां ज्ञेयस्तु विस्तरः / अनूना नातिरिक्तास्ते यस्मात्मर्वे विवस्वतः
vaivasvata nisargeṇa teṣāṃ jñeyastu vistaraḥ / anūnā nātiriktāste yasmātmarve vivasvataḥ
वैवस्वत की सृष्टि-व्यवस्था के अनुसार उनका विस्तार जानना चाहिए। वे न न्यून हैं न अधिक, क्योंकि वे सब विवस्वान् से उत्पन्न हैं।