Vaṃśānuvārṇana and the Transition to the Fourth (Upasaṃhāra) Pada
आभूतसंप्लवात्तस्माद्भवः संसार उच्यते / यथा सर्वाणि भूतानां जायन्ते वर्षणेष्विह
ābhūtasaṃplavāttasmādbhavaḥ saṃsāra ucyate / yathā sarvāṇi bhūtānāṃ jāyante varṣaṇeṣviha
भूतों के प्रलय तक जो निरन्तर प्रवाह चलता है, वही ‘भव’ अर्थात् ‘संसार’ कहलाता है; जैसे यहाँ वर्षा के समय सब प्राणी उत्पन्न होते हैं।