Vaṃśānuvārṇana and the Transition to the Fourth (Upasaṃhāra) Pada
तस्मादुदकभृत्सूर्यस्तपतीति हि कथ्यते / नावृष्ट्या तपते सूर्य्यो नावृष्ट्या परिषिच्यते
tasmādudakabhṛtsūryastapatīti hi kathyate / nāvṛṣṭyā tapate sūryyo nāvṛṣṭyā pariṣicyate
इसी कारण सूर्य को ‘उदकभृत्’ कहा जाता है कि वह जल को धारण कर तपता है। अनावृष्टि में सूर्य तपता है और अनावृष्टि में शीतल जल से सिंचित नहीं होता।