Vaṃśānuvārṇana and the Transition to the Fourth (Upasaṃhāra) Pada
तान्येवात्र प्रलीयन्ते भूमित्वमुपयान्ति च / सप्तरश्मिरथो भूत्वा उदत्तिष्ठद्विभावसुः
tānyevātra pralīyante bhūmitvamupayānti ca / saptaraśmiratho bhūtvā udattiṣṭhadvibhāvasuḥ
वे ही यहाँ लय को प्राप्त होकर मिट्टी में मिल जाते हैं और भूमिरूप हो जाते हैं। तब विभावसु सात किरणों वाले रथ पर आरूढ़ होकर ऊँचा उठता है।