Vaṃśānuvārṇana and the Transition to the Fourth (Upasaṃhāra) Pada
भुक्त्वा त्रैलोक्यम ध्यस्था युगाख्या ह्येकसप्ततीः / पितृभिर्मनुभिः सार्द्धं क्षीणे मन्वन्तरे तदा
bhuktvā trailokyama dhyasthā yugākhyā hyekasaptatīḥ / pitṛbhirmanubhiḥ sārddhaṃ kṣīṇe manvantare tadā
त्रैलोक्य के मध्य में स्थित होकर वे ‘युग’ नामक इकहत्तर अवधियों तक भोग करते हैं। तब मन्वंतर के क्षीण होने पर वे पितरों और मनुओं सहित (एकत्र) होते हैं।