Vaṃśānuvārṇana and the Transition to the Fourth (Upasaṃhāra) Pada
एको वैवस्वतश्चैव सावर्णो मनुरुच्यते / रौच्यो भौत्यश्च यौ तौ तु मतौ पौलहभार्गवौ / भौत्यस्यैवाधिपत्ये तु तूर्णं कल्पस्तु पूर्यते
eko vaivasvataścaiva sāvarṇo manurucyate / raucyo bhautyaśca yau tau tu matau paulahabhārgavau / bhautyasyaivādhipatye tu tūrṇaṃ kalpastu pūryate
एक वैवस्वत और एक सावर्ण—ये मनु कहे जाते हैं। रौच्य और भौत्य—ये दोनों क्रमशः पौलह और भार्गव माने गए हैं। और भौत्य के आधिपत्य में ही यह कल्प शीघ्र पूर्ण होता है।