गङ्गानयनम् (Gaṅgānayana) — “The Bringing/Leading of the Gaṅgā”
ततस्तानागतान्दृष्ट्वा मुनीन्भृगुकुलोद्वहः / अर्घपाद्यादिभिः सम्यक्पूजयामास सादरम्
tatastānāgatāndṛṣṭvā munīnbhṛgukulodvahaḥ / arghapādyādibhiḥ samyakpūjayāmāsa sādaram
तब उन्हें आए हुए देखकर भृगुकुल-श्रेष्ठ ने उन मुनियों का अर्घ्य, पाद्य आदि से विधिपूर्वक और आदर सहित पूजन किया।