गङ्गानयनम् (Gaṅgānayana) — “The Bringing/Leading of the Gaṅgā”
कालाग्निमिव लोकांस्त्रीन्दग्ध्वा पूर्वं निजेच्छया / तद्दोषशान्त्यै तपसि प्रवृत्तमिव् देहिनम्
kālāgnimiva lokāṃstrīndagdhvā pūrvaṃ nijecchayā / taddoṣaśāntyai tapasi pravṛttamiv dehinam
मानो कालाग्नि की भाँति पहले अपनी इच्छा से तीनों लोकों को दग्ध कर, फिर उस दोष की शांति के लिए तप में प्रवृत्त हुआ कोई देहधारी हो।