गङ्गानयनम् (Gaṅgānayana) — “The Bringing/Leading of the Gaṅgā”
प्रसीद जय रामेति तुष्टुवुर्मुनयो ऽखिलाः / ततो ऽस्त्राग्निस्फुरद्धूमपटलैः शकलीकृतम्
prasīda jaya rāmeti tuṣṭuvurmunayo 'khilāḥ / tato 'strāgnisphuraddhūmapaṭalaiḥ śakalīkṛtam
“प्रसीद, जय राम!” कहकर सभी मुनियों ने स्तुति की। तब अस्त्रों की अग्नि से उठते धुएँ के घने पटलों ने सब कुछ चूर-चूर कर दिया।