गङ्गानयनम् (Gaṅgānayana) — “The Bringing/Leading of the Gaṅgā”
प्रक्षोभं परमं जग्मुर्देवासुरमहोरगाः / संधितास्त्रं भृगुश्रेष्ठं क्रोधसंरक्तलोचनम्
prakṣobhaṃ paramaṃ jagmurdevāsuramahoragāḥ / saṃdhitāstraṃ bhṛguśreṣṭhaṃ krodhasaṃraktalocanam
देव, असुर और महोरग अत्यन्त क्षोभ को प्राप्त हो गए। भृगु-श्रेष्ठ का संधान किया हुआ अस्त्र देखकर, जिसकी आँखें क्रोध से लाल थीं।