गङ्गानयनम् (Gaṅgānayana) — “The Bringing/Leading of the Gaṅgā”
संक्षुब्धसागराकारः स तदा स्वबलाश्रयात् / निस्तोयमर्णवं कर्तुमियेष रुषितो भृशम्
saṃkṣubdhasāgarākāraḥ sa tadā svabalāśrayāt / nistoyamarṇavaṃ kartumiyeṣa ruṣito bhṛśam
तब वह क्षुब्ध सागर के समान हो गया; अपने बल के आश्रय से अत्यन्त क्रुद्ध होकर समुद्र को निर्जल करने की इच्छा करने लगा।