रामस्य हिमवद्गमनम्
Rama’s Journey to Himavat
स गत्वा पर्वतवरं नानाद्रुमलतास्थितम् / ददर्श विपुलैः शृङ्गैरुल्लिखन्तमिवांबरम्
sa gatvā parvatavaraṃ nānādrumalatāsthitam / dadarśa vipulaiḥ śṛṅgairullikhantamivāṃbaram
वह नाना वृक्षों और लताओं से युक्त श्रेष्ठ पर्वत पर गया और उसके विशाल शिखरों को मानो आकाश को कुरेदते हुए देखा।