रामस्य हिमवद्गमनम्
Rama’s Journey to Himavat
वशी चकार चाक्षाणि प्रत्याहारपरायणः / धारणाभिः स्थिरीचक्रे मनश्चञ्चलमात्मवान्
vaśī cakāra cākṣāṇi pratyāhāraparāyaṇaḥ / dhāraṇābhiḥ sthirīcakre manaścañcalamātmavān
प्रत्याहार में तत्पर होकर उसने इन्द्रियों को वश में किया। आत्मवान् होकर धारणाओं से उसने चंचल मन को स्थिर कर दिया।