रामस्य हिमवद्गमनम्
Rama’s Journey to Himavat
पूजयामास देवेशमेकाग्रमनसा नृप / अनिकेतः स वर्षासु शिशिरे जलसंश्रयः
pūjayāmāsa deveśamekāgramanasā nṛpa / aniketaḥ sa varṣāsu śiśire jalasaṃśrayaḥ
हे नृप! उसने एकाग्र मन से देवेश की पूजा की; वह निराश्रय होकर वर्षा में भी और शिशिर में भी जल का आश्रय लेता रहा।