रामस्य हिमवद्गमनम्
Rama’s Journey to Himavat
संघुष्यमाणं परितः सेवितं मन्दवायुना / शफरीमत्स्यसंघैश्च विचरद्भिरितस्ततः
saṃghuṣyamāṇaṃ paritaḥ sevitaṃ mandavāyunā / śapharīmatsyasaṃghaiśca vicaradbhiritastataḥ
वह चारों ओर से कलरव से गूँज रहा था, मंद पवन उसे सहला रही थी; और शफरी मछलियों के झुंड इधर-उधर विचर रहे थे।