रामस्य हिमवद्गमनम्
Rama’s Journey to Himavat
रवैः कीचकवेणुनां मधुरीकृतकाननः / नितंबस्थलसंसक्ततुषारनिचयैग्यम्
ravaiḥ kīcakaveṇunāṃ madhurīkṛtakānanaḥ / nitaṃbasthalasaṃsaktatuṣāranicayaigyam
कीचक बाँसुरियों के नाद से उसका कानन मधुर हो उठा है; और नितम्ब-स्थलों पर लगे हिम-समूहों से वह एकरूप-सा दीखता है।