रामस्य हिमवद्गमनम्
Rama’s Journey to Himavat
आक्रान्तचकितानेकवनपङ्क्तिशताकुलम् / तत्र तत्रातिरम्यैश्च शिलाकुहरनिर्गतैः
ākrāntacakitānekavanapaṅktiśatākulam / tatra tatrātiramyaiśca śilākuharanirgataiḥ
अनेक वन-पंक्तियों के समूह से वह भरा था, जहाँ-तहाँ विचरते प्राणी चकित होकर भागते थे; और स्थान-स्थान पर शिला-कुहरों से निकलते अत्यन्त रमणीय स्रोत थे।