रामस्य हिमवद्गमनम्
Rama’s Journey to Himavat
विततानेकसंसक्तशाखाग्राविरलच्छदैः / पाटलैर्विटपच्छायैरुपशल्यसमुत्थितैः
vitatānekasaṃsaktaśākhāgrāviralacchadaiḥ / pāṭalairviṭapacchāyairupaśalyasamutthitaiḥ
फैली हुई, परस्पर गुँथी अनेक शाखाओं के अग्रभागों पर विरल पत्तों से बनी, पाटल-वृक्षों की छाया उपशल्य-तृणों के बीच उठी हुई थी।