रामस्य हिमवद्गमनम्
Rama’s Journey to Himavat
जलस्थलरुहानेककुसुमोत्करवर्षिभिः / गात्राह्लादकरैर्मन्दं वीज्यमानं वनानिलैः
jalasthalaruhānekakusumotkaravarṣibhiḥ / gātrāhlādakarairmandaṃ vījyamānaṃ vanānilaiḥ
जल और स्थल में उगे अनेक पुष्प-समूहों की वर्षा-सी होती थी; देह को आनंद देने वाली मंद वन-समीर धीरे-धीरे पंखा-सी झलती थी।